लोकतंत्र की रक्षा में पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है, लेकिन जब वही पुलिस साम्प्रदायिक सद्भाव को बनाए रखने में लापरवाही बरतती है, तो समाज में अराजकता का बीज बोया जाता है। गाजियाबाद के कवि नगर क्षेत्र में एसीपी सूर्यबली मौर्य की कमान में चल रही पुलिस की निष्क्रियता एक ऐसा ही उदाहरण है, जो न केवल कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि पुलिस की निष्पक्षता पर भी गहरा आघात करती है। 23 दिसंबर 2025 को बालाजी एनक्लेव, गोविंदपुरम में कुत्तों को खाना खिलाने के एक मामूली विवाद को साम्प्रदायिक रंग देने वाले असामाजिक तत्वों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि पूरे मामले के साक्ष्य मौजूद हैं और पुलिस को इसकी पूरी जानकारी है। यह निष्क्रियता क्या दर्शाती है? क्या एसीपी मौर्य किसी राजनीतिक दबाव में हैं या फिर उनके व्यक्तिगत हित इसमें शामिल हैं?

इस घटना की जड़ में एक साधारण विवाद था, जो जल्दी ही साम्प्रदायिक तनाव में बदल गया। असामाजिक तत्वों ने इसे अवसर बनाकर शहर के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश की, लेकिन कवि नगर पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। घटना को दो सप्ताह से अधिक बीत चुके हैं, फिर भी कोई मुकदमा दर्ज नहीं हुआ, कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। इससे उन तत्वों के हौसले बुलंद हो रहे हैं जो सरकार को बदनाम करने और समाज को बांटने में लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में पुलिस के कुछ अधिकारियों को आर्थिक लाभ पहुंचा है, जिस कारण इसे दबाया जा रहा है। यदि यह सत्य है, तो यह पुलिस की ईमानदारी पर एक कलंक है। एसीपी सूर्यबली मौर्य, जो क्षेत्र की कानून व्यवस्था के जिम्मेदार हैं, आखिर क्यों चुप हैं? क्या वे किसी राजनीतिक व्यक्ति को खुश करने में लगे हैं, या फिर असामाजिक तत्वों को संरक्षण दे रहे हैं?

इसके विपरीत, गाजियाबाद के ही शालीमार गार्डन क्षेत्र में पुलिस ने तलवार वितरण के मामले को कितनी तत्परता से संभाला। 29 दिसंबर 2025 को हिंदू रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष भूपेंद्र उर्फ पिंकी चौधरी और उनके बेटे हर्ष चौधरी द्वारा खुलेआम तलवारें बांटने और उग्र प्रदर्शन करने पर शालीमार गार्डन पुलिस ने तुरंत मुकदमा दर्ज किया। वीडियो वायरल होने के बाद 10 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, और अब मुख्य आरोपी पिता-पुत्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया है। एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि इस घटना से सार्वजनिक शांति भंग हुई थी, और पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया। यह साफ है कि शालीमार गार्डन पुलिस ने कानून का पालन किया। यह दर्शाता है कि जब इच्छाशक्ति हो, तो कार्रवाई संभव है। लेकिन कवि नगर में एसीपी मौर्य की निष्क्रियता क्यों? क्या दोनों क्षेत्रों में पुलिस की नीति अलग-अलग है?

बालाजी एनक्लेव में हुई घटना के दौरान पत्रकारों पर हुए हमले को भी कवि नगर पुलिस ने नजरअंदाज किया। घटना की कवरेज करने वाले पत्रकारों पर हमला हुआ, लेकिन 15 दिन बाद केवल एक पत्रकार की शिकायत पर मुकदमा दर्ज किया गया। यह कविनगर पुलिस की पत्रकारों के प्रति असंवेदनशीलता को उजागर करता है। पत्रकार शासन प्रशासन और समाज की आंखें हैं, और उन्हें नजरअंदाज करना पुलिस की अपनी विश्वसनीयता को कमजोर करना है। क्या एसीपी मौर्य यह भूल गए हैं कि आज की छोटी लापरवाही कल बड़े दंगे का रूप ले सकती है?

पुलिस प्रशासन से अपील है कि 23 दिसंबर की घटना को गंभीरता से लें। असामाजिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई करें, साम्प्रदायिक माहौल बिगाड़ने वालों को जेल भेजें। एसीपी सूर्यबली मौर्य की भूमिका की जांच होनी चाहिए – क्या इसमें कोई हित सिद्धि है? यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाएगी, तो समाज में अराजकता फैलेगी। समय रहते सुधार जरूरी है, अन्यथा गाजियाबाद का शांतिपूर्ण माहौल खतरे में पड़ सकता है। पुलिस की निष्पक्षता ही जनता का विश्वास बनाए रख सकती है – इसे खोने की भूल न करें।

अपूर्वा चौधरी

वरिष्ठ पत्रकार



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