ब्यूरो चीफ दिनेश जमदग्नि:

ग़ाज़ियाबाद। पिछले कई वर्षों से समिति के कामकाज में व्यापक वित्तीय अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए  चिट्स, फर्म्स एंड सोसाइटीज उप रजिस्ट्रार गाजियाबाद ने श्री रामलीला समिति राजनगर गाजियाबाद के खातों की जांच और लेखापरीक्षा का आदेश दिया है।

उप रजिस्ट्रार ने समिति के खातों की वर्ष 2016-17 से पूर्ण लेखापरीक्षा करने का निर्देश दिया है। उप रजिस्ट्रार ने समिति के सभी अभिलेखों और चल एवं अचल संपत्तियों की जांच के साथ-साथ समिति के बैंक खातों की भी जांच का आदेश दिया है।

उप रजिस्ट्रार ने समिति के संस्थापक सदस्य और पूर्व अध्यक्ष राजेंद्र त्यागी और आजीवन सदस्य आकाश वशिष्ठ की शिकायतों पर यह आदेश पारित किया।

लेखापरीक्षा और जांच चार सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया गया है, जिसका खर्च समिति द्वारा वहन किया जाएगा।

उप रजिस्ट्रार ने दिनांक 10.09.2025 के अपने पूर्ववर्ती आदेश के क्रम में उपरोक्त आदेश पारित किया, जिसमें उन्होंने जय कुमार गुप्ता के नेतृत्व वाली कार्यकारी समिति को कालातीत घोषित किया था। दिनांक 10.09.2025 के आदेश में कहा गया था कि जय कुमार गुप्ता को राजनगर श्री रामलीला समिति के अध्यक्ष पद पर रहने का विधिवत कोई अधिकार नहीं था।

उप रजिस्ट्रार को दी गई अपनी शिकायत में राजेंद्र त्यागी ने कहा है कि जय कुमार गुप्ता और उनकी समिति ने अपने सात साल के पूरे कार्यकाल में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं कीं।

आकाश वशिष्ठ ने यह भी दावा किया है कि जय कुमार गुप्ता और उनकी समिति ने भारी मात्रा में चंदा इकट्ठा किया, जिसमें से अधिकांश नकद था, जिसे उन्होंने रामलीला आयोजन के बजाय अपने निजी खर्चों के लिए गबन किया। आकाश वशिष्ठ की शिकायत में कहा गया है कि धार्मिक प्रयोजन के लिए एकत्रित धन को जय कुमार गुप्ता और उनकी समिति ने पूरी तरह से निजी उपयोग में लिया।

आकाश वशिष्ठ की शिकायत में कहा गया है कि जय कुमार गुप्ता के नेतृत्व वाली समिति ने धार्मिक कार्यों के लिए जनता से प्राप्त दान से अपने परिवारों को मुफ्त भोजन के कूपन बांटे, अपने व्यापारिक और राजनीतिक उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए महंगे होर्डिंग लगवाए और जनता से एकत्र धन से महंगे उपहार बांटे।

गौरतलब है कि आकाश वशिष्ठ ने 2024 में जय कुमार गुप्ता और उनकी समिति द्वारा किए गए कई वित्तीय कदाचारों को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में याचिका भी दायर की है। उच्च न्यायालय ने तब याचिकाकर्ता से कहा था कि उक्त समिति द्वारा किए गए अपराधों के लिए एफआईआर क्यों नहीं दर्ज हुई, गौरतलब है श्री रामलीला समिति राजनगर द्वारा लगातार संविधान विरुद्ध कार्य किये जा रहे हैं। संविधान में 101 आजीवन सदस्य बनाए जाने का प्रावधान है, परंतु समिति के अध्यक्ष जयकुमार गुप्ता ने संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए 350 आजीवन सदस्य बनाए जिनसे प्रतिवर्ष 11000/- रुपए वसूल किए गए। इसके अलावा पुराने सदस्यों को बड़ी संख्या में समिति से बाहर कर दिया गया। 

लगातार शिकायत मिलने पर उप रजिस्ट्रार गाजियाबाद द्वारा संस्था को कालातीत घोषित किया गया। ताजा उदाहरण रामलीला मैदान में अनधिकृत रूप से विद्युत पोल लगाए जाने से जुड़ा हुआ है जिसमें धार्मिक आयोजन के लिए एकत्रित दान का उपयोग मैदान में विद्युत पोल लगाने में नियम विरुद्ध कर दिया गया। जबकि मैदान के अंदर पर्याप्त रूप से विद्युत पोल पूर्व में ही नगर निगम द्वारा लगाए गए हैं, फिर भी श्रद्धालुओं के दान का दुरुपयोग अन्य मद में किया गया।





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