पटना के डीएम शीर्षत कपिल अशोक, बिहार म्यूज़ियम के निदेशक अंजनी बाबू एवं मधुबनी कला क्षेत्र से जुड़े कलाकार
प्रियंका झा, मधुबनी। मिथिला चित्रकला और इसके कलाकारों के लिए 21 फ़रवरी, 2026  ऐतिहासिक साबित हुआ, जब वर्षों से लंबित जितवारपुर क्राफ्ट विलेज परियोजना के कार्यों का औपचारिक शुभारंभ किया गया। यह परियोजना भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय, बिहार सरकार और Bihar Museum के संयुक्त प्रयासों से साकार हो रही है।

लंबे समय से कागज़ों में अटकी यह योजना अब ज़मीन पर उतरती दिखाई दे रही है। इस दिशा में बिहार म्यूजियम के निदेशक अंजनी कुमार सिंह की विशेष रुचि और पहल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही कला से जुड़े अधिकारियों और विशेषज्ञों की निरंतर प्रतिबद्धता ने भी इस परियोजना को गति प्रदान की है।

गौरतलब है कि पूर्व में वस्त्र मंत्रालय द्वारा आवंटित राशि कार्य प्रारंभ न होने के कारण वापस लौटानी पड़ी थी, जिससे कलाकारों में निराशा का माहौल था। परंतु अब प्रशासनिक स्तर पर सक्रिय पहल के चलते यह गतिरोध समाप्त होता दिख रहा है।

कुछ माह पूर्व गया में क्राफ्ट विलेज स्थापित करने के प्रस्ताव पर सामाजिक और सांस्कृतिक हलकों में यह सवाल उठाया गया था कि जब मिथिला चित्रकला की जन्मभूमि जितवारपुर है, तो यहां की उपेक्षा क्यों की जाए। अब सरकार के इस निर्णय से कलाकारों और कला प्रेमियों में संतोष का वातावरण है।

परियोजना से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि क्राफ्ट विलेज के निर्माण से न केवल स्थानीय कलाकारों को बेहतर मंच मिलेगा, बल्कि मिथिला पेंटिंग को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर और सशक्त पहचान भी प्राप्त होगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल जितवारपुर को विश्व मानचित्र पर एक सशक्त कला ग्राम के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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