मेरे प्रिय शहर वासियों, भाइयों और बहनों!
आज मैं यहाँ एक नागरिक के नाते नहीं, बल्कि आपके परिवार के एक सदस्य के नाते सबसे व्यक्तिगत रूप से संवाद कर रहा हूँ। आज सवाल हमारे शहर के विकास का नहीं, बल्कि हमारी चुप्पी का फायदा उठाकर हमारी जेबों पर डाले गए नाजायज बोझ का है।
साथियों, इसे 'ट्रिपल इंजन' सरकार का तोहफा कहें या शहर वासियों के आत्मसम्मान पर एक कड़ा तमाचा?
सच्चाई यह है कि गृहकर (House Tax) में बेतहाशा बढ़ोतरी का यह जाल 2022 में ही बुन लिया गया था। हमारे द्वारा चुने गए मेयर और पार्षदों ने इस पर मुहर तभी लगा दी थी। लेकिन तब उन्हें आपके वोटों की जरूरत थी। विधानसभा और लोकसभा चुनावों के डर से इस सच्चाई को दबाए रखा गया। और जैसे ही चुनाव बीते, उन्होंने अपना असली रंग दिखा दिया।
विभागीय अधिकारियों को दोष देना व्यर्थ है!
नगर आयुक्त का काम नीतियों को लागू करना है, लेकिन नीतियां बनाने का काम उन जनप्रतिनिधियों का था जिन्हें हमने अपना रक्षक समझकर चुना था। आज रक्षक ही भक्षक का कार्य कर रहे हैं। शहर वासियों के खून-पसीने की कमाई से हम टैक्स भरते हैं, और बदले में हमें क्या मिलता है? खस्ताहाल सड़कें, जलभराव और नरक जैसा जीवन?
हमारी मेहनत की कमाई का इस्तेमाल अपनी सत्ता बचाने वाली 'मुफ्त की योजनाओं' में किया जा रहा है और बोझ डाला जा रहा है मध्यम वर्ग और गरीब जनता पर।
अब सहने की सीमा खत्म हो चुकी है!
भ्रष्टाचार और तानाशाही का यह खेल अब और नहीं चलेगा। यदि आज हम चुप रहे, तो आने वाली पीढ़ियां हमसे सवाल पूछेंगी। हमें दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, एक होकर अपनी आवाज बुलंद करनी होगी।
मेरी आप सभी से अपील है:
1-इस अन्यायपूर्ण गृहकर वृद्धि का पूर्ण बहिष्कार करें।
2-शांतिपूर्ण लेकिन बेहद मजबूत आंदोलन का हिस्सा बनें।
3-घर से बाहर निकलें और सरकार को मजबूर करें कि वह इस जनविरोधी फैसले को वापस ले।
उठो शहर वासियों! अपनी ताकत पहचानो।
जो भी भाई इस संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता है, वह सीधे मेरे नंबर 9213371000 पर संपर्क करे।
याद रखिए, एकता में ही शक्ति है और हमारा हक हमें मांग कर नहीं, लड़ कर लेना होगा!
इंकलाब जिंदाबाद! हमारी एकता जिंदाबाद!
दादा अवधेश शर्मा
अध्यक्ष गाजियाबाद उद्योग व्यापार मण्डल
9213371000



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