पुनीत माथुर। जिला कारागार मथुरा को बंदी सुधार गृह की तरह से संचालित किया जा रहा है। कारागार में समय-समय पर बंदियों को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। आगामी समय में जब बंदी कारागार से अपनी सजा पूरी कर के बाहर निकलेंगे तो वह ख़ुद अपने दम पर उद्यमी बन कर अन्य लोगों को भी रोजगार प्रदान कर सकेंगे तथा समाज में नया संदेश देंगे कि जिला कारागार में बंदियों को बहुत कुछ सिखाया जाता है। 

ताजा उदाहरण है कि आगामी होली में अब लोग ऐसे ऑर्गेनिक गुलाल से होली खेल सकेंगे जिसे जिला कारागार में बंदी प्राकृतिक सब्जियों और फलों से बना रहे हैं और यह बिना केमिकल के प्रयोग से प्राकृतिक रूप से बनाया जा रहा है । जिला कारागार में बंदियों द्वारा चुकंदर, गाजर, पालक, हल्दी आदि के प्रयोग से हरा, पीला और गुलाबी गुलाल बनाया जा रहा है जिसकी बिक्री के लिए जिला कारागार के समीप मुलाकात-घर पर स्टाल लगाया जाएगा।

आज 22 फरवरी को डैंपियर नगर स्थित पाञ्चजन्य ऑडिटोरियम में लगने वाले विधिक साक्षरता शिविर में भी कारागार के बंदियों के द्वारा तैयार किए गए इन प्राकृतिक गुलाल के पैकेट, भगवान जी की पोशाक, हथकरघा में निर्मित साड़ी, तौलिया आदि जनता के समक्ष प्रदर्शित किए गए जहां से उनको आमजन ने खूब खरीदा।

https://www.facebook.com/share/v/1CDGXv8kNS/

यदि यह न्यूज़ आपको पसंद आई हो तो इसको शेयर करें 🙏

Share To:

Post A Comment: