ग़ाज़ियाबाद : दिनेश जमदग्नि। ग़ाज़ियाबाद सेक्टर-23, यशोदा हॉस्पिटल के पास खुला नाला मौत को निमंत्रण दे रहा है। क्या एक रिबन बाँध देने से दुर्घटनाएँ रुक जाएँगी? क्या यही है प्रशासन की जिम्मेदारी?
रोज़ाना इस रास्ते से सैकड़ों लोग गुजरते हैं —बुजुर्ग, बच्चे, मरीज, महिलाएँ, वाहन चालक। ज़रा सी चूक और सीधा मौत के मुँह में गिरने का खतरा। नोएडा हादसे में इंजीनियर की मौत के बाद भी ग़ाज़ियाबाद नगरनिगम की नींद नहीं खुल रही।
बड़ा सवाल ये है कि क्या हादसा होने के बाद ही कार्रवाई होगी? क्या किसी की जान जाएगी, तब जागेगा सिस्टम?
प्रशासन से मांग:
✅ तुरंत नाले को ढकवाया जाए
✅ स्थायी सुरक्षा व्यवस्था की जाए
✅ केवल दिखावे की रस्में बंद हों
जिम्मेदार अधिकारियों को समझना चाहिए कि जनता की जान सस्ती नहीं है। अब लापरवाही नहीं चलेगी। नगर निगम प्रशासन को समाचार पत्रों में अन्य माध्यमों से स्थानीय नागरिकों एवं समाजसेवियों तथा मीडिया जगत द्वारा कई बार सूचना दी जा रही है लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
यदि भविष्य में नोएडा जैसी दुर्घटना हो जाती है तो ग़ाज़ियाबाद नगर निगम प्रशासन पूर्ण रूप से जिम्मेदार होगा एवं माना जाएगा।




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