दिन छोड़ दूं, साल छोड़ दूं,                                          सदियों का तो मैं ख़याल छोड़ दूं,                                    तेरा नाम जो धड़कनों में बस जाए,                                  मैं सांसों का भी ख़याल छोड़ दूं!

आज वेलेंटाइन डे पर इस संगीतमय वीडियो का आनंद लें - यह रुमानी गीत प्रेम के उस सार को बयां करता है जो इस रोमांटिक मौसम में हवा में तैरता रहता है। 

मनोज मनमौजी के इस गीत के जादू को महसूस करें।सुधाकर मणि और चोला स्टूडियोज द्वारा निर्मित यह वीडियो आपके दिल को छू जाएगा। 

इस वीडियो एल्बम की खासियत है कि इसमें मनोज मनमौजी का गीत ही असली है बाकी सब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कमाल है... संगीत, गायन, फिल्मांकन, संपादन यहां तक कि नायक-नायिका भी!!

पेशे से इंजीनियर पैशन से लेखक
गीतकार मनोज मनमौजी

बता दें कि गीतकार मनोज मनमौजी पेशे से इंजीनियर हैं  लेकिन पैशन से लेखक। इनकी पैदाइश वाराणसी में हुई थी और जड़ें (डीएनए) अवध की हैं, गंगा जमुनी का लहज़ा, विरासत में मिला। हिंदी से बहुत लगाव रहा और उर्दू अक्सर ही इनकी कविताओं और नज़्मों में दबे पांव चली आती है। लिखने का अनोखा अंदाज़ पारंपरिक शैली से काफ़ी हटकर है। पिछले 1575 दिनों से भी अधिक दिनों से ये  रोज़ लिखते रहे हैं।

“रवानियाँ” इनकी पहली पुस्तक है, जो कविताओं का अनोखा संकलन है जिसमें ज़िंदगी के विभिन्न रंगों को बोलचाल की भाषा में व्यक्त किया गया है। इस पुस्तक को अखिल भारतीय स्तर पर रेलवे मंत्रालय का पुरस्कार भी मिला है।

इन्होंने AI का उपयोग करना शुरू किया है। स्वरचित नज़्म को एक म्यूजिकल वीडियो में बदलने के लिए। इनका मानना है कि AI के द्वारा एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में बहुत परिवर्तन आएंगे और म्यूजिक अब स्टूडियो में नहीं, पब्लिक स्वयं ही बनाएगी।



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