ग़ाज़ियाबाद/नोएडा एक्सटेंशन : बृजेश श्रीवास्तव। रविवार 8 फरवरी को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के शताब्दी वर्ष के पावन अवसर पर 'सकल हिंदू समाज' द्वारा आयोजित ‘विराट हिंदू सम्मेलन’ शृंखला के तहत हरनंदी महानगर के विभिन्न क्षेत्रों में भक्ति और राष्ट्रवाद का अद्भुत संगम देखने को मिला। इन्दिरापुरम में 'लव जिहाद' पर मर्मस्पर्शी नाटक और गौड़ सिटी में निकली भव्य कलश यात्रा आज के कार्यक्रमों के मुख्य आकर्षण रहे।
प्रमुख आकर्षण: जागरूकता और संस्कृति का संगम: -
आज के कार्यक्रमों में वैचारिक चेतना और सांस्कृतिक भव्यता का अनूठा प्रदर्शन हुआ। इन्दिरापुरम में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान 'लव जिहाद' के खतरों और सामाजिक जागरूकता पर आधारित एक विशेष नाटक का मंचन किया गया, जिसने उपस्थित जनसमूह को झकझोर दिया। वहीं, गौड़ सिटी के क्षेत्रों में मातृशक्ति द्वारा निकाली गई भव्य कलश यात्रा ने पूरे वातावरण को केसरिया रंग और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया।
विशाल जन-भागीदारी और संख्या बल: -
महानगर के अलग-अलग कोनों में आयोजित इन सम्मेलनों में समाज के हर वर्ग की रिकॉर्ड उपस्थिति रही:
• इन्दिरापुरम: यहाँ 3 से अधिक विशाल कार्यक्रमों में 4,000 से अधिक नागरिकों ने सहभागिता की।
• खोड़ा: यहाँ के 8 विभिन्न केंद्रों पर आयोजित कार्यक्रमों में 3,000 से अधिक लोग जुटे।
• गौड़ सिटी और क्रॉसिंग रिपब्लिक: इन क्षेत्रों में 4,000 से अधिक की विशाल संख्या ने हिंदू एकता का परिचय दिया।
देखें वीडियो: -
पूज्य संतों का ओजस्वी मार्गदर्शन: -
विभिन्न केंद्रों पर पूज्य संतों की उपस्थिति ने समाज को आध्यात्मिक संबल प्रदान किया। इन्दिरापुरम में स्वामी दीपांकर, विजय नगर में साध्वी प्राची, खोड़ा में साध्वी शिवाचार्य कृष्णा और गौड़ सिटी में महंत नवलकिशोर महाराज ने अपने संबोधन में सनातन धर्म की रक्षा और सामाजिक एकजुटता का आह्वान किया।
'पंच परिवर्तन' से राष्ट्र निर्माण का संकल्प: -
कार्यक्रमों में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित विभाग प्रचारक अतुल कुमार, महानगर प्रचारक राजन कुमार, प्रांत विद्या भारती मंत्री रामवरुण सहित अन्य प्रांत व विभाग के पदाधिकारियों ने संघ के 100 वर्षों के सेवा कार्यों की चर्चा की। वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि संघ का लक्ष्य केवल संगठन बनाना नहीं, बल्कि समाज को बदलना है। उन्होंने हर हिंदू परिवार से ‘पंच परिवर्तन’—सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी का आग्रह और नागरिक कर्तव्य—को अपने जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।
"आज का यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि हिंदू समाज अपनी संस्कृति और राष्ट्र की रक्षा के लिए जागृत हो चुका है। 'पंच परिवर्तन' के माध्यम से हम हर घर को संस्कार और स्वावलंबन का केंद्र बनाएंगे।" प्रवक्ता, विराट हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति।
कार्यक्रम के अंत में फूलों की होली खेली गई और सभी नागरिकों ने समरसता भोज (प्रसाद) ग्रहण किया। इस अवसर पर भारी संख्या में स्थानीय निवासी, स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





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