ग़ाज़ियाबाद : दिनेश जमदग्नि। सोमवार 9 फरवरी को ग़ाज़ियाबाद उद्योग व्यापार मंडल समिति ने जिलाधिकारी गाजियाबाद के माध्यम से भारत सरकार के मुखिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन दिया। समिति के अध्यक्ष अवधेश शर्मा ने बताया कि यूजीसी के काले कानून द्वारा सत्ता के लालच में किस तरह से हिंदू भाइयों के बीच खाई पैदा की जा रही है इस विषय को लेकर ज्ञापन दिया, जो कि इस प्रकार है: -

माननीय प्रधानमंत्री महोदय,

सविनय निवेदन है कि इस पत्र के माध्यम से आपका ध्यान यूजीसी के नए कानून की ओर आकृष्ट कराना चाहता हूँ, जिसे अनेक नागरिक एक काले कानून के रूप में देख रहे हैं। इस कानून के माध्यम से हिंदू समाज को विभिन्न वर्गों में विभाजित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे समाज के भीतर आपसी वैमनस्य और असंतोष बढ़ने की आशंका है। ऐसा प्रतीत होता है कि समाज को बांटकर सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए रखना ही इसका प्रमुख उद्देश्य रह गया है।

वास्तविकता यह है कि एससी, एसटी, ओबीसी और सामान्य वर्ग के बीच आपसी रूप से कोई शिकवा-शिकायत या द्वेष नहीं है। यदि कोई असंतोष है, तो वह केवल उन राजनीतिक दलों और उनके नेताओं से है, जो अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए समाज को विभाजित करते रहते हैं। स्वतंत्रता के बाद का इतिहास इस बात का साक्षी है कि इन वर्गों के बीच कभी भी व्यापक स्तर पर कोई आपसी संघर्ष नहीं हुआ।

यह भी एक विडंबना है कि एससी-एसटी अधिनियम लागू हुए लगभग 35 वर्ष बीत जाने के बाद भी आरक्षण का वास्तविक लाभ आज तक एससी, एसटी तथा ओबीसी समाज के सबसे निचले और वंचित तबके तक पूर्ण रूप से नहीं पहुँच पाया है। इसके बावजूद, इन समाजों को केवल आश्वासनों और प्रतीकात्मक योजनाओं तक सीमित रखा गया है, जबकि उनके वास्तविक उत्थान के लिए ठोस और प्रभावी कदमों का अभाव रहा है।

सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी राजनीतिक दल इन वर्गों को आपस में लड़ाकर अपने हित साधने में लगे रहते हैं। यह भी देखा गया है कि विभिन्न वर्गों के नेता आपस में सौहार्दपूर्ण संबंध रखते हैं, किंतु अपने समर्थकों के बीच विभाजन और कटुता को बढ़ावा दिया जाता है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि यूजीसी के इस विवादित कानून को वापस लेकर या उसमें आवश्यक संशोधन कर, एससी, एसटी और ओबीसी समाज के वास्तविक उत्थान हेतु ऐसे सार्थक कदम उठाए जाएँ, जिनसे आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुँच सके।

यह विश्वास दिलाना चाहता हूँ कि एससी, एसटी एवं ओबीसी समाज के हित में लाई जाने वाली किसी भी सकारात्मक और न्यायसंगत योजना में सवर्ण समाज पूर्ण सहयोग करेगा। साथ ही, सवर्ण समाज के हितों की अनदेखी या अहित किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। हमारा उद्देश्य सभी देशवासियों के समग्र और संतुलित उत्थान में योगदान देना है।

आशा है कि आप इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार करेंगे और देश की सामाजिक एकता एवं समरसता को सुदृढ़ करने हेतु उचित निर्णय लेंगे।



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