देहरादून : शुभांगी। रविवार 30 जुलाई। सहायक निदेशक शिक्षा एवं संस्कृत शिक्षा डॉ चंडी प्रसाद घिल्डियाल ने योग प्रशिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ होने को शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचायक होने के साथ साथ सर्वजन हिताय बताया है।

इस संदर्भ में मंत्री धन सिंह रावत से हुई भेंट में सहायक निदेशक ने कहा कि योग प्रशिक्षकों के संबंध में जो निर्णय बहुत पहले लिया जाना चाहिए था, मुख्यमंत्री के साथ मिलकर ऐसा निर्णय लेकर शिक्षा मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत ने बहुत बड़ी इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। यह निर्णय पूरे प्रदेश की जनता के लिए सर्वजन हिताय है।

डॉ घिल्डियाल ने कहा कि सर्वजन हिताय इसलिए है कि किसी भी देश अथवा प्रदेश का भविष्य वहां के बच्चों पर निर्भर करता है और बच्चे जब शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होंगे तब ही सुदृढ़ समाज की संकल्पना साकार हो सकती है। आज समाज में कार बहुत हो गई हैं परंतु संस्कार लुप्त होते जा रहे हैं। जिससे युवा वर्ग में ज्ञान, चरित्र और एकता की कमी देखने को मिल रही है। उसके लिए विद्यालय शिक्षा में शारीरिक व्यायाम की तर्ज पर शारीरिक योगा की शिक्षा दिए जाने से बच्चों का शारीरिक के साथ-साथ मानसिक विकास भी होगा। जिससे उनके अंदर ज्ञान, चरित्र, धैर्य और शांति के दिव्य गुणों का विकास होगा, जो एक अच्छे मानव के लिए परम आवश्यक है।

इस सर्वजन हिताय कार्य के लिए मंत्री का आभार जताते हुए विद्वान अधिकारी डॉ घिल्डियाल ने कहा कि यह उत्तराखंड का सौभाग्य है कि शिक्षा मंत्री ही स्वास्थ्य मंत्री भी हैं और संस्कृत शिक्षा के मंत्री भी हैं। इसलिए उनका ध्यान एक साथ शिक्षा, संस्कार एवं स्वास्थ्य के समन्वय पर है, जो प्रदेश के युवाओं के हित में है।

सहायक निदेशक डॉ घिल्डियाल ने कहा कि संस्कृत शिक्षा के हित में भी मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत द्वारा धीरे-धीरे बहुत गंभीर और दूरगामी निर्णय लिए जा रहे हैं। इसमें संस्कृत में पीएचडी करने वाले छात्रों को विशेष छात्रवृत्ति शुरू की गई है। साथ ही प्रबंधकीय संस्कृत विद्यालयों में प्रशासनिक योजना भी तैयार की  जा रही है, जिससे संस्कृत शिक्षा में बरसों से लंबित कार्यों को आगे बढ़ाया जा सके। प्रदेश के 13 जनपदों में आदर्श संस्कृत ग्रामों की संकल्पना को भी धरातल पर उतारने का कार्य सरकार की मंशा के अनुरूप तेजी से चल रहा है। उन्होंने बताया कि उन्हें 3 जनपदों देहरादून, रुद्रप्रयाग और चमोली की विशेष जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री जी द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में उन्होंने जिलाधिकारियों से समन्वय बनाकर संस्कृत ग्रामों की फाइल शासन में जमा कर दी है।

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