नई दिल्ली। एनआईआईटी फाउंडेशन की चेंजमेकर एकेडमी में नामांकित वंचित समुदायों के महत्वाकांक्षी उद्यमियों द्वारा 50 से अधिक उद्यम शुरू किए जा चुके हैं। इस एकेडमी में 180 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए हैं, जिससे स्पष्ट है कि किस तरह यह प्रोग्राम उद्यमिता प्रशिक्षण को रोज़गार के अवसरों में बदल रहा है।

ये उद्यम शिक्षा, भोजन, हेल्थकेयर, सिलाई, ब्यूटी एवं वेलनेस, कला एवं कढ़ाई और सस्टेनेबल प्रोडक्ट्स जैसे क्षेत्रों पर शुरू किए गए हैं। फाउंडेशन अब उद्यम शुरू होने के बाद भी उद्यमी को सहयोग प्रदान करता है, ताकि वे नए ग्राहकों के साथ जुड़ सकें, संचालन का बेहतर प्रबन्धन करते हुए अपने बिज़नेस को बनाए रख सकें।

एनआईआईटी फाउंडेशन द्वारा महीने भर चलने वाले दान उत्सव कैंपेन (1 से 31 अक्टूबर) के तहत इस पहल को अंजाम दिया जा रहा है। इसके माध्यम से यह गैर-लाभ संस्था लोगों और संस्थाओं को उद्यमिता प्रशिक्षण, कारोबार के विकास और लगातार मार्गदर्शन में योगदान देने के लिए आमंत्रित कर रही है।

फाउंडेशन का मानना है कि पहली पीढ़ी के उद्यमियों को अक्सर कारोबार की योजना बनाने के कौशल से कहीं ज़्यादा मदद की ज़रूरत होती है। अपने बिज़नेस आइडिया को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए उन्हें कई तरह के उपकरणों, रजिस्ट्रेशन, ब्रांडिंग, ग्राहकों तक पहुँच, मार्केट के साथ जुड़ाव और विशेषज्ञों की सलाह की ज़रूरत पड़ती है।

इसी के मद्देनज़र चेंजमेकर एकेडमी चार-पाँच महीने का एक व्यवस्थित प्रोग्राम उपलब्ध कराती है, जिसमें कारोबार की योजना, ग्राहक और मार्केट की समझ, फैसले लेना और बातचीत करने का कौशल आदि सभी पहलु शामिल किए जाते हैं। इस प्रोग्राम के प्रतिभागियों को 22 घंटे की बिज़नेस मेंटरिंग और विशेषज्ञों की सलाह के साथ-साथ नेतृत्व विकास और नेटवर्किंग के मौके भी मिलते हैं।

इस अवसर पर एनआईआईटी फाउंडेशन की कंट्री डायरेक्टर डॉ. चारू कपूर ने कहा, “आइडिया से बिज़नेस के लिए तैयार होने और फिर असल में बिज़नेस चलाने और उसे बनाए रखने तक का सफर अलग-अलग तरह की चुनौतियाँ लेकर आता है।“

उन्होंने कहा कि फाउंडेशन लगातार कोचिंग और मार्गदर्शन की सुविधा देने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि उद्यमी जब अपना उद्यम शुरू करते हैं तो उन्हें कई ज़मीनी स्तर पर चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने लोगों और संस्थाओं से आग्रह किया कि वे आर्थिक योगदान, पेशेवर विशेषज्ञता और मार्गदर्शन के ज़रिए इस पहल को समर्थन प्रदान करें।

इस प्रोग्राम ने कई उद्यमियों को लाभान्वित किया है। इनमें शामिल हैं उड़ीसा के सुकिंदा की गुडुली जिन्होंने सिलाई में अपनी दिलचस्पी को ‘एजी टेलर्स: दिल से दिल तक’ बिज़नेस में बदला। इसी तरह मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के रहने वाले प्रवीण कुमार बंधे ने मुक्ता दूध डेयरी शुरू की। वे स्थानीय लोगों को दूध सप्लाई करते हैं और साथ ही अपने ग्राहकों की संख्या बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं।

फाउंडेशन के अनुसार इन दोनों उदाहरणों से स्पष्ट है कि कैसे उद्यमिता में सही प्रशिक्षण मिलने की वजह से लोगों में अपना काम करने की काबिलियत विकसित हो सकती है। हालाँकि, उनकी तरक्की इस बात पर भी निर्भर करती है कि वे काम-काज से जुड़ी चुनौतियों का सामना कैसे करते हैं और अपने प्रोडक्ट्स और सेवाओं के लिए कैसे मार्केट बनाते हैं।

एनआईआईटी फाउंडेशन अपने दान उत्सव कैंपेन के वेबपेज के माध्यम से दान स्वीकार कर रहा है। दानदाता आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर में छूट का लाभ उठा सकते हैं।



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