ग़ाज़ियाबाद। गाजियाबाद पुलिस पर उत्पीड़न, फर्जी मुकदमा दर्ज करने और निष्पक्ष पत्रकारिता की आवाज दबाने के गंभीर आरोपों को लेकर जिला मुख्यालय के बाहर शुरू हुआ पत्रकारों का अनिश्चितकालीन धरना बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। धूप और भीषण गर्मी के बावजूद दर्जनों पत्रकार दिन-रात धरना स्थल पर डटे हुए हैं। आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने साफ कर दिया है कि जब तक न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष थमने वाला नहीं है।
धरने को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अपूर्वा चौधरी ने पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा "हमें हमारा हक चाहिए, किसी से भीख नहीं। अगर न्याय नहीं दे सकते तो बता दो... क्या फर्क पड़ता है कि 100 अपराधी छूट जाएं, लेकिन बेगुनाह पत्रकारों को जेल भेजना जरूरी है?"
अपूर्वा चौधरी ने अधिकारियों के सुस्त रवैये पर तंज कसते हुए कहा कि प्रशासन भले ही नींद में हो या उस पर कोई असर न हो रहा हो, लेकिन पत्रकार झुकेंगे नहीं। उन्होंने कहा, "कुछ लोग सोच रहे होंगे कि हम किसी की सिफारिश कराएंगे, तो वे बेफिक्र रहें। हमारी डायरेक्टरी में सबके नंबर हैं, पर हमें उनकी जरूरत नहीं है क्योंकि हम अपना संवैधानिक अधिकार अच्छी तरह जानते हैं। यह लड़ाई किसी की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि उन सभी ईमानदार पत्रकारों की है जिनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।"
क्या है पूरा मामला: -
धरनारत पत्रकारों के अनुसार, यह पूरा विवाद 20 मई की एक घटना से जुड़ा है। आरोप है कि सिद्धार्थ विहार स्थित जल निगम चौकी पर तैनात एक पुलिसकर्मी ने पत्रकार ललित चौधरी के साथ अभद्रता और मारपीट की थी। पत्रकारों का कहना है कि वास्तविक दोषी पुलिसकर्मी पर कार्रवाई करने के बजाय, गाजियाबाद पुलिस ने उल्टा पत्रकारों के खिलाफ ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया।
अपूर्वा चौधरी ने आरोप लगाया कि पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर वे और उनके साथी 10 से अधिक बार संबंधित अधिकारियों से मिलकर साक्ष्य सौंप चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें केवल खोखला आश्वासन ही हाथ लगा।
धरने में मुख्य रूप से पंकज शर्मा, पवन चौधरी, विकास कुमार, ब्रजभूषण, सद्दाम हुसैन, सतीश कुमार, सुमन मिश्रा सहित दर्जनों पत्रकार साथी पूरी रात धरना स्थल पर डटे रहे और न्याय मिलने तक कंधे से कंधा मिलाकर साथ खड़े रहने का संकल्प लिया।



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