ग़ाज़ियाबाद: बृहस्पतिवार 11 जून। राजनगर वार्ड-84 के ट्यूबवेल पंप-हाउस पर नगर निगम पार्षद द्वारा किए गए कथित अवैध कब्जे का मामला अब तूल पकड़ गया है। अधिवक्ता, लेखक एवं समाजसेवी आकाश वशिष्ठ की शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लेते हुए अपर मुख्य सचिव को पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। 

क्या है पूरा मामला: -

आकाश वशिष्ठ ने 2 मई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगर विकास, महापौर सुनीता दयाल, नगर आयुक्त और पुलिस आयुक्त ग़ाज़ियाबाद को स्पीड पोस्ट व ईमेल के जरिए शिकायत भेजी थी। 

शिकायत में आरोप है कि वार्ड-84 के पार्षद ने सेक्टर-5, राजनगर स्थित आर्य समाज पार्क के दो कक्षीय ट्यूबवेल पंप-हाउस पर अवैध कब्जा कर उसे निजी कार्यालय में बदल दिया है। इसे 'जन-संपर्क केंद्र' का नाम देकर बेदखली से बचने का प्रयास किया गया, जबकि यह स्थान अधिकांश समय बंद रहता है और जनसेवा से इसका कोई संबंध नहीं है।

कानूनी प्रावधानों का हवाला, शिकायत में कहा गया है कि यह कब्जा कई कानूनों का उल्लंघन है:

1. उ.प्र. नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 30-A: पार्षदों को राज्य सरकार के नियमों के बिना कोई भत्ता या सुविधा नहीं दी जा सकती। ऐसे कोई नियम अस्तित्व में नहीं हैं। 

2. उ.प्र. सार्वजनिक परिसर अधिनियम, 1972: धारा 4, 5 एवं 14 के तहत अनधिकृत कब्जाधारियों को हटाने का प्रावधान है।  

3. सुप्रीम कोर्ट के आदेश: रामूर्ति सुधुभाई बनाम गोपीनाथ नाइक (AIR 1968 SC 1919) में स्पष्ट है कि अधिकार समाप्त होने के बाद भी कब्जा जारी रखना 'अनधिकृत' है। वहीं राजीव सूरी बनाम ASI मामले में 25 मार्च 2025 को कोर्ट ने कहा कि कोई भी संस्था सरकारी परिसर पर कब्जा नहीं कर सकती।  'उप महापौर' पद को लेकर भी सवाल

शिकायत में यह भी आरोप है कि पार्षद खुद को 'उप महापौर' के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि यह पद 2007 में ही समाप्त किया जा चुका है। साथ ही सेक्टर-10, राजनगर स्थित निगम के निर्धारित कार्यालय का उपयोग न करने पर भी सवाल उठाए गए हैं। 

आकाश वशिष्ठ ने मांग की है कि पार्षद को पंप-हाउस से बेदखल कर स्थान को मूल स्वरूप में बहाल किया जाए, अवैध कब्जे के लिए क्षतिपूर्ति वसूली जाए, FIR दर्ज हो और उनकी संपत्तियों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।

सीएम कार्यालय की कार्रवाई: -

मुख्यमंत्री कार्यालय ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए अपर मुख्य सचिव, नगर विकास विभाग को तत्काल जांच कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच में पंप-हाउस के मूल उपयोग, आवंटन रिकॉर्ड और पार्षद द्वारा किए गए निर्माण/बदलाव की भी समीक्षा की जाएगी।

फिलहाल नगर निगम और जिला प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

शिकायत में उठाए गए मुख्य बिंदु: -  

• ट्यूबवेल पंप-हाउस केवल जल आपूर्ति/उद्यान विभाग के उपयोग हेतु निर्धारित  

• 'जन-संपर्क केंद्र' के नाम पर निजी कार्यालय के रूप में इस्तेमाल  • पूर्व पार्षद के समय से चला आ रहा कब्जा हटाया नहीं गया  

• सेक्टर-10 स्थित सरकारी कार्यालय खाली छोड़ दिया गया  

• आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का भी आरोप



Share To:

Post A Comment: