ग़ाज़ियाबाद। मंगलवार 9 जून। राजनगर वार्ड-84 के नगर निगम पार्षद पर सरकारी ट्यूबवेल पंप-हाउस को अवैध रूप से निजी कार्यालय में बदलने का आरोप लगा है। अधिवक्ता और समाजसेवी आकाश वशिष्ठ ने इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव नगर विकास, महापौर सुनीता दयाल, नगर आयुक्त और पुलिस आयुक्त गाजियाबाद को पत्र भेजकर कार्रवाई की मांग की है।

क्या है पूरा मामला: -  

शिकायत के अनुसार, सेक्टर-5, राजनगर आर्य समाज पार्क स्थित दो कक्षीय ट्यूबवेल पंप-हाउस पर पार्षद ने कब्जा कर रखा है। आरोप है कि इसे 'जन-संपर्क केंद्र' का नाम देकर इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि अधिकांश समय इस पर ताला लगा रहता है। पत्र में कहा गया है कि यह स्थान केवल जल आपूर्ति या उद्यान विभाग के कर्मचारियों के उपयोग के लिए निर्धारित है।

आकाश वशिष्ठ का दावा है कि सेक्टर-10, राजनगर में नगर निगम का निर्धारित कार्यालय बेहतर स्थिति में होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा। साथ ही आरोप लगाया गया कि पार्षद खुद को “उप महापौर” बता रहे हैं, जबकि यह पद 2007 में ही समाप्त कर दिया गया था।

कानूनी आधार पर उठाए सवाल: -  

शिकायत में उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 30-A का हवाला दिया गया है। इसके तहत राज्य सरकार के नियमों के बिना पार्षदों को परिवहन भत्ता या अन्य सुविधाएं देने का प्रावधान नहीं है। साथ ही उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1972 की धाराएं 4, 5 और 14 के तहत सार्वजनिक संपत्ति से बेदखली का प्रावधान बताया गया है। 

पत्र में सुप्रीम कोर्ट के दो फैसलों का भी जिक्र है। रामूर्ति सुधुभाई बनाम गोपीनाथ नाइक (AIR 1968 SC 1919) में कोर्ट ने कहा था कि बिना अधिकार के या अधिकार समाप्त होने के बाद जारी कब्जा अनधिकृत माना जाएगा। 25 मार्च 2025 को राजीव सूरी बनाम भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मामले में भी कोर्ट ने निर्देश दिया कि कोई भी संस्था सरकारी परिसर पर कब्जा नहीं कर सकती।

ये की गई हैं मांगें: -  

शिकायतकर्ता ने पांच बिंदुओं पर कार्रवाई की मांग की है: - 

1. पार्षद को ट्यूबवेल पंप-हाउस से बेदखल किया जाए।   

2. स्थान को मूल स्वरूप में बहाल कर जल आपूर्ति/उद्यान विभाग को सौंपा जाए।   

3. अवैध कब्जे की अवधि की क्षतिपूर्ति वसूली जाए।  

4. आपराधिक मामला दर्ज कर FIR की जाए।    

5. पार्षद की संपत्तियों की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए। 

फिलहाल इस मामले में पार्षद या नगर निगम का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



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