आओ हम सब मिलकर राजस्थान दिवस मनाएं,

वीर धरा की गौरव गाथा, जन-जन तक पहुंचाएं।

राजस्थान की धरोहर और संस्कृति को आगे बढ़ाएं,

पुरखों के बलिदानों का हम, मिलकर मान बढ़ाएं।

"पधारो म्हारे देश" में अपनी अलग ही बात है,

अतिथि देवो भव की परंपरा, सदियों से साथ है।

केसरिया रंग पहने, यहाँ शौर्य की अपनी बिसात है,

राजाओं के महल के अपने अलग ही ठाठ हैं।

कहीं झीलों की हो नगरी, जहाँ लहरें गीत सुनाती हैं,

कहीं अरावली की चोटियाँ, बादलों से बतियाती हैं।

या करें पहाड़ों की बात, जहाँ गूंजती वीरता की कहानी,

रेत के धोरों में भी यहाँ, बहती है प्रेम की अमृत वाणी।

सांस्कृतिक विरासत यहाँ की, है सबसे अनमोल उपहार, 

वीर धरा की गौरव-गाथा, गाता यहाँ का हर द्वार। 

हवामहल करता यहाँ पर, हर पल हवा से बात, 

गुलाबी शहर की रंगत देख, निखरती सुनहरी रात।

ढोल-नगाड़ों की थाप पर, जब गूंजे "घूमर" का तराना,

दुनिया झुककर करती नमन, ऐसा है म्हारो राजस्थान सुहाना।

वन्दना झा (विप्रा)

नर्सिंग आफिसर 

गुरु तेग बहादुर हास्पिटल



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