🙏जय श्री राधे कृष्णा 🙏
मित्रों आज का ये सुंदर श्लोक श्रीमद्भगवद्गीता के अट्ठारहवें अध्याय 'मोक्षसंन्यासयोग से ही ..
भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः ।
ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम् ॥
(अध्याय 18, श्लोक 55)
इस श्लोक का भावार्थ : (भगवान श्री कृष्णा कहते हैं) - उस पराभक्ति के द्वारा वह (सच्चिदानन्दघन ब्रह्म में एकीभाव से स्थित, प्रसन्न मनवाला योगी) मुझ परमात्मा को, मैं जो हूँ और जितना हूँ, ठीक वैसा-का-वैसा तत्त्व से जान लेता है तथा उस भक्ति से मुझको तत्त्व से जानकर तत्काल ही मुझमें प्रविष्ट हो जाता है।
शुभ रविवार !
पुनीत माथुर
ग़ाज़ियाबाद।
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