🙏राधे राधे 🙏

आप सभी को प्रणाम मित्रों !

आज का श्लोक भी श्रीमद्भगवद्गीता के सातवें अध्याय 'ज्ञान विज्ञान योग' से ही है ....

अन्तवत्तु फलं तेषां तद्भवत्यल्पमेधसाम् ।
देवान्देवयजो यान्ति मद्भक्ता यान्ति मामपि ॥
(अध्याय 7, श्लोक 23)

इस श्लोक का अर्थ है : (कल के श्लोक में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि कई पुरुष अलग - अलग देवताओं को पूजते हैं और वो देवता उन्हें इच्छित फलों को प्रदान करते हैं, आज के श्लोक में श्री कृष्ण आगे कह रहे हैं) परन्तु उन अल्प बुद्धिवालों का वह फल नाशवान है तथा वे देवताओं को पूजने वाले देवताओं को प्राप्त होते हैं और मेरे भक्त चाहे जैसे ही भजें, अन्त में वे मुझको ही प्राप्त होते हैं।

आपका दिन शुभ हो !

पुनीत माथुर  
ग़ाज़ियाबाद
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