ग़ाज़ियाबाद 10 जुलाई 2026: ग़ाज़ियाबाद के कविनगर स्थित श्री धार्मिक रामलीला समिति (पंजी0) में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। डिप्टी रजिस्ट्रार, फर्म्स सोसाइटीज तथा चिट्स, गाजियाबाद की जांच में समिति की वर्तमान प्रबंध समिति को 2017 से ही 'कालातीत' पाया गया है। पूर्व सांसद डॉ. रमेश चन्द्र तोमर की शिकायत पर हुई जांच के बाद अपर जिलाधिकारी (नगर) ने 4 जुलाई 2026 को कड़ी कार्रवाई के आदेश जारी किए हैं।
जांच में क्या मिला: -
1. कालातीत समिति: समिति की पंजीकृत नियमावली के अनुसार कार्यकाल तीन वर्ष है, लेकिन वर्तमान प्रबंध समिति का निर्वाचन 2014 में हुआ था। 2017 से समिति अवैध रूप से कार्य कर रही थी।
2. वित्तीय गड़बड़ी: वर्ष 2023-24 के दस्तावेजों में यात्रा, दैनिक भत्ता, रामलीला मण्डली, मैदान मेंटेनेंस, विद्युत बिल, शोभा यात्रा, साउंड, फर्नीचर-टेंट आदि के भुगतान केवल वाउचर के आधार पर किए गए। बिल, चालान, कार्य विवरण जैसे सहायक दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए। वाउचरों पर किसी के हस्ताक्षर नहीं, केवल राशि अंकित है।
3. बड़ा खर्च: रामलीला मण्डली रु0 30,72,318/-, मैदान मेंटेनेंस रु0 8,29,394/-, विद्युत बिल रु0 15,31,760/-, शोभा यात्रा रु0 24,24,405/-, साउंड रु0 11,29,250/-, फर्नीचर-टेंट रु0 13,58,742/-, तथा डोनेशन सक्षम फाउंडेशन को रु0 11,00,000/- का भुगतान वाउचर से किया गया।
4. अनुबंध में लापरवाही: संस्था द्वारा कराए गए कार्यों के अनुबंध पत्र, बिजली बिल व अन्य पत्राजात प्रबंध समिति उपलब्ध नहीं करा सकी।
5. नियमों की अनदेखी: समिति ने वित्तीय नियमों की अनदेखी कर प्रक्रिया का अनुपालन नहीं किया। सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 की धारा 24 का उल्लंघन पाया गया।
देखें वीडियो: -
क्या कार्रवाई हुई: -
डिप्टी रजिस्ट्रार की संस्तुति पर अपर जिलाधिकारी (नगर) ने तत्काल प्रभाव से वर्तमान प्रबंध समिति के बैंक खातों एवं प्रबंधकीय अधिकारियों पर रोक लगा दी है। साथ ही, जांच प्रकरण के निस्तारण तक व्यवस्था संचालन हेतु 2011 की पूर्व प्रबंध समिति को कार्य करने की अनुमति दी गई है। 2011 समिति के अध्यक्ष राम कुमार निवासी के-117, कविनगर हैं।
पृष्ठभूमि: -
पूर्व सांसद डॉ. रमेश चन्द्र तोमर, जो समिति के आजीवन सदस्य भी हैं, ने 08.10.2025 को शिकायत की थी कि वर्तमान समिति वित्तीय अनियमितताएं कर रही है और आय-व्यय का विवरण नहीं दे रही। नगर मजिस्ट्रेट कार्यालय ने 14 अक्टूबर 2025 को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर साक्ष्य मांगे थे, लेकिन कोई व्यक्ति लिखित या मौखिक साक्ष्य देने नहीं आया।
समिति का पंजीकरण 20.06.1973 को हुआ था। 2014 के बाद से समिति विवादग्रस्त है। मामला उच्च न्यायालय इलाहाबाद में भी विचाराधीन है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अंतिम निर्णय न्यायालय के आदेश के बाद ही होगा, तब तक 2011 की समिति ही कार्य देखेगी।



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