ब्यूरो चीफ मनोज कुमार:
नई दिल्ली। शाहदरा डिस्ट्रिक के गुरु तेग बहादुर अस्पताल के लाइब्रेरी हॉल मे बाबा साहब आंबेडकर को याद करते हुए बताया, 14 अप्रैल का दिन अपने आप में बेहद खास है। इस दिन भारतीय संविधान के मुख्य वास्तुकार बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की जयंती मनाई जाती है। उनका जन्म 14 अप्रैल 1851 को मध्य प्रदेश के महू गांव में हुआ था। वह वकील होने के साथ-साथ अर्थशास्त्री राजनीतिज्ञ और महान समाज सुधारक भी थे। इतना ही नहीं भारत के संविधान के मसौदा समिति के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने दलित समाज के उत्थान के लिए भरसक प्रयास किया। साथ ही क्षमता स्वतंत्रता बंधुत्व और न्याय पर आधारित संविधान की नींव रखी थी।
सोमवार को सार्वजनिक स्वास्थ्य पर उनका दृष्टिकोण" कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मे मुख्य अतिथि के रूप मे पद्मश्री डॉ जगदीश प्रसाद ओर डॉ सिद्धार्थ रामू भी आमंत्रित रहे। जबकि वक्ता के रूप मे जीटीबी अस्पताल के डायरेक्टर डॉ विनोद कुमार, डॉ धीरज शाह, डॉ कुलदीप (प्रोफेसर, मेडिसिन डिपार्टमेंट), डॉ अरुण शर्मा ओर डॉ अनिल यादव उपस्थित रहे। जिन्होंने वहां उपस्थित जनसमूह को स्वास्थ्य से जुडी जानकारियां सांझा की ओर बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के जीवन पर प्रकाश डाला।
ज़ीटीबी के एमएस डॉ विनोद कुमार ने बताया कि जीवन मे स्वस्थ जीवन सबसे महत्वपूर्ण है और सामाजिक रूप से सभी को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल आफ इकोनॉमिक्स से उच्च शिक्षा प्राप्त की। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के पास कुल 32 डिग्रियां थी। वह सबसे शिक्षित भारतीयों में से एक थे। उन्होंने बीए ,एमए, एमएससी,पीएचडी, डीएससी, एलएलबी, और बैरिस्टर एट ला जैसी प्रमुख डिग्रियां हासिल की थीं। बाबा साहब ने नौ भाषाओं में महारत हासिल की। वह 64 विषयों के ज्ञाता थे। वह स्वतंत्र भारत के पहले कानून और न्याय मंत्री बने। डॉ कुलदीप सिंह ने बताया बाबा साहब आंबेडकर जी ने अपना पूरा जीवन सामाजिक कार्यो मे लगा दिया। उन्होंने पूरा प्रयास किया था कि सभी को अच्छी शिक्षा, अच्छा स्वास्थ्य ओर समाज मे समानता मिले। डॉ कुलदीप ने बताया स्वस्थ जीवन प्रत्येक नागरिक का अधिकार है और इसके लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।
डॉ सिदार्थ रामू ने अपने वक्तव्य मे कहा कि पहले दबे-कुचले समाज के साथ काफी भेदभाव किया जाता था। उनको गांव के बाहर दक्षिणी भाग मे बसाया जाता था। कुपोषण की वजह से यह लोग बिमारियों का शिकार होते थे। दूषित पानी ओर भोजन भी इनके स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता था। उन्होंने छुआछूत और जातिवाद के खिलाफ जीवन भर संघर्ष किया और समानता का संदेश दिया। बाबा साहब ने अस्पर्शयता का अंत करने के लिए महाद सत्याग्रह किया। इसमें अछूतों के लिए सार्वजनिक टैंक से पानी लेने के अधिकार और मंदिर प्रवेश के लिए उन्होंने आंदोलन किया। हिंदू कोड बिल के माध्यम से महिलाओं को तलाक और संपत्ति में अधिकार दिलाने का प्रयास किया। बाबा साहब आंबेडकर ने संघर्ष करके उनके अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी ओर इनको समाज में समानता दिलाई।






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