मधुबन-बापूधाम में लगभग ₹152 करोड़ की लागत से निर्मित बुनकर मार्ट अब ‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ के रूप में होगा विकसित, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशभर के क्राफ्ट एवं हस्तशिल्प से जुड़े कारीगरों को परिसर में स्थल उपलब्ध कराने एवं परिसर को कन्वेंशन हेतू भी उपयोग किए जाने के दिए निर्देश
ग़ाज़ियाबाद। बुधवार 5 नवंबर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गाजियाबाद आगमन के दौरान गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष द्वारा प्राधिकरण की मधुबन-बापूधाम योजना में निर्मित अत्याधुनिक बुनकर मार्ट का सूक्ष्म प्रस्तुतीकरण किया गया। प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश को परियोजना की परिकल्पना, निर्माण, उपलब्ध सुविधाओं, आधारभूत संरचना एवं इसकी भविष्यगत उपयोगिता के संबंध में अवगत कराया गया।
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा मधुबन-बापूधाम योजना में लगभग 38,340 वर्गमीटर क्षेत्रफल में करीब ₹152 करोड़ की लागत से इस भव्य परियोजना का निर्माण कराया गया है। यह परियोजना अपनी व्यापक आधारभूत संरचना एवं आधुनिक सुविधाओं के दृष्टिगत गाजियाबाद के विकास में एक महत्वपूर्ण आयाम स्थापित करती है। इस परिसर में ओपन बुनकर मार्ट दुकानें, दुकानें एवं प्रदर्शनी गैलरी, बड़े एक्सपो हॉल, 560 सीटों की क्षमता वाला ऑडिटोरियम, कन्वेंशन एवं कॉन्फ्रेंस हॉल, फूड कोर्ट, ओपन थिएटर, बुनकरों के लिए 10 रेजिडेंस यूनिट्स एवं ठहरने की सुविधा तथा लगभग 1,000 कारों की पार्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उक्त समस्त कार्य लगभग पूर्ण किए जा चुके हैं, जिसके आगामी माह में मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश द्वारा लोकार्पण की भी प्रबल संभावना है।
परियोजना की भौगोलिक स्थिति एवं कनेक्टिविटी भी इसकी उपयोगिता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है। यह केंद्र ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से लगभग 6 किलोमीटर तथा दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से लगभग 7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराज्यीय स्तर के प्रदर्शकों, उद्यमियों, व्यापारियों एवं आगंतुकों के लिए यहां पहुंचना सुगम होगा।
परियोजना के व्यापक उद्देश्यों एवं प्रदेश के पारंपरिक शिल्प, हस्तकला तथा कारीगरों के हितों को दृष्टिगत रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए कि इस केंद्र का स्वरूप केवल बुनकरों तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे प्रदेशभर के क्राफ्ट, हस्तशिल्प एवं पारंपरिक कलाओं से जुड़े सभी कारीगरों एवं उद्यमियों के लिए एक व्यापक मंच के रूप में विकसित किया जाए। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश द्वारा इसका नाम मात्र ‘बुनकर मार्ट’ न रखकर ‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ किए जाने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पारंपरिक शिल्प एवं हस्तकला से जुड़े कारीगरों, शिल्पकारों एवं उद्यमियों को इस प्रांगण में उनके उत्पादों के प्रदर्शन, बिक्री एवं विपणन के लिए समुचित स्थल उपलब्ध कराया जाए। इस व्यवस्था के माध्यम से प्रदेश के किसी भी जनपद में प्रचलित विशिष्ट शिल्पकला से जुड़े कारीगरों को एक साझा मंच प्राप्त हो सकेगा, जहां वे अपनी कला एवं उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ-साथ सीधे ग्राहकों, व्यापारियों एवं संभावित खरीदारों से जुड़ सकेंगे। इससे उनके उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने तथा उनकी आय एवं रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने में सहायता मिलेगी।
‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ की अवधारणा प्रदेश की पारंपरिक कला को रोजगार एवं उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इसके अंतर्गत उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों की विशिष्ट हस्तशिल्प कलाओं एवं पारंपरिक उत्पादों को एक ही परिसर में स्थान उपलब्ध कराने की परिकल्पना है। इसमें बुनकरों के साथ लकड़ी, धातु, पत्थर, मिट्टी, वस्त्र, कालीन, चिकनकारी, जरी-जरदोजी, टेराकोटा तथा अन्य पारंपरिक शिल्पों से जुड़े कारीगरों एवं उद्यमियों को अपनी कला के प्रदर्शन एवं व्यावसायिक गतिविधियों के संचालन का अवसर मिल सकेगा।
इस केंद्र में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के विशिष्ट उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किए जाने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे ‘एक जनपद-एक उत्पाद’ (ODOP) योजना की अवधारणा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। इस प्रकार प्रदेश के प्रत्येक जनपद की विशिष्ट पहचान रखने वाले उत्पादों को एकीकृत मंच पर प्रदर्शित करने के साथ-साथ उनकी ब्रांडिंग, विपणन एवं व्यावसायिक संभावनाओं को भी विस्तार मिल सकेगा।
परिसर में उपलब्ध एक्सपो हॉल, प्रदर्शनी गैलरी, ऑडिटोरियम एवं कन्वेंशन हॉल जैसी सुविधाओं के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिल्प प्रदर्शनियों, एक्सपो, व्यापार मेलों, क्रेता-विक्रेता सम्मेलनों तथा अन्य व्यावसायिक आयोजनों के आयोजन की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे प्रदेश के शिल्पकारों को बड़े बाजारों एवं व्यावसायिक संस्थानों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही पारंपरिक शिल्पकला में आधुनिक डिजाइन, तकनीक, पैकेजिंग एवं विपणन के समावेश से उत्पादों की गुणवत्ता एवं प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा।
इस पहल का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य पारंपरिक शिल्प एवं हस्तकला से जुड़े व्यक्तियों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करना तथा उनकी आजीविका को सुदृढ़ बनाना है। विशेष रूप से छोटे कारीगरों, महिला शिल्पकारों, युवाओं, स्वयं सहायता समूहों एवं सूक्ष्म उद्यमियों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन एवं बिक्री के लिए उपयुक्त मंच मिलने से उनके आर्थिक सशक्तीकरण को बढ़ावा मिलेगा। इससे पारंपरिक कलाओं के संरक्षण के साथ-साथ नई पीढ़ी को भी इन व्यवसायों से जोड़ने में सहायता प्राप्त होगी।
मुख्यमंत्री उत्तरप्रदेश के निर्देशों के क्रम में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण द्वारा इस निर्मित परियोजना को व्यापक एवं बहुउद्देशीय स्वरूप प्रदान करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही की जाएगी, ताकि यह केंद्र केवल एक प्रदर्शनी स्थल न रहकर प्रदेशभर के कारीगरों, शिल्पकारों एवं हस्तशिल्प उद्यमियों के लिए रोजगार, विपणन, उद्यमिता एवं व्यावसायिक विस्तार का एक सशक्त केंद्र बन सके।
‘विश्वकर्मा एक्सपो एवं कन्वेंशन सेंटर’ के रूप में इस परियोजना का नया स्वरूप प्रदेश की समृद्ध शिल्प विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ ‘लोकल टू ग्लोबल’ की अवधारणा को धरातल पर उतारने, स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने तथा पारंपरिक हुनर को आर्थिक आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।





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