संस्कारशाला आधुनिक शिक्षा और धार्मिक शिक्षा के बीच सामंजस्य बनाते हुए बच्चों को सच्चा हिंदू बनायेगी - यति माँ प्रत्यंगिरा गिरी 

ग़ाज़ियाबाद, मुरादनगर। रविवार 11 अक्टूबर को महाकाली वाहिनी द्वारा नई पीढ़ी को सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों एवं श्रेष्ठ संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से श्रीमहाकाली पीठ, हनुमत धाम, जूना अखाड़ा, मुरादनगर में संस्कारशाला का शुभारंभ किया गया।

पूज्य गुरुदेव महामंडलेश्वर यति नरसिंहानन्द गिरि जी महाराज के द्वारा महामंडलेश्वर यति माँ प्रत्यंगिरा गिरि जी के सानिध्य में प्रारंभ की गई यह संस्कारशाला महाकाली वाहिनी की एक महत्वपूर्ण पहल है।

इस संस्कारशाला का मुख्य उद्देश्य 6 से 12 वर्ष के बच्चों को केवल धार्मिक शिक्षा देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, चरित्रवान, आत्मविश्वासी, अनुशासित एवं जिम्मेदार नागरिक बनाना है।

संस्कारशाला में बच्चों को सनातन धर्म एवं भारतीय संस्कृति का ज्ञान, रामायण-महाभारत की प्रेरक कथाएँ, माता-पिता एवं गुरुजनों का सम्मान, सत्यनिष्ठा, अनुशासन, योग, आत्मरक्षा, सेवा, करुणा तथा व्यावहारिक जीवन मूल्यों की शिक्षा दी जाएगी।

इस अवसर पर महामंडलेश्वर यति माँ प्रत्यंगिरा गिरि जी ने संस्कारशाला के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों से जोड़ना भी अत्यंत आवश्यक है। संस्कारवान बच्चे ही सशक्त परिवार और जिम्मेदार समाज की आधारशिला बन सकते हैं।

उन्होंने कहा कि महाकाली वाहिनी का संकल्प ऐसी पीढ़ी तैयार करना है, जो अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी होने के साथ शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक रूप से भी सशक्त हो।

महाकाली वाहिनी का उद्देश्य संस्कारशाला को केवल एक शिक्षण केंद्र नहीं, बल्कि संस्कार, चरित्र निर्माण, आत्मरक्षा और समाज सेवा के एक व्यापक अभियान के रूप में विकसित करना है।

महाकाली वाहिनी ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को इस पहल से जोड़ने तथा नई पीढ़ी के उज्ज्वल एवं संस्कारवान भविष्य के निर्माण में सहयोग करने का आह्वान किया।



Share To:

Post A Comment: