विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र का यह दुर्भाग्य है की वर्तमान परिपेक्ष में राजनीति का स्तर निरंतर गिर रहा है। वंदे मातरम् हो या फिर राष्ट्र की सांस्कृतिक धरोहर, उसकी प्राचीन शिक्षा को नवीन शिक्षा प्रणाली में जोड़ना, राजनीति के नाम पर इन विषयों को कटघरे में लाकर उपहास का विषय बनाना तुच्छ राजनीति है। यह कहना ग़लत नहीं होगा कि देश में समय के साथ साक्षरता बढ़ रही है परंतु राजनीति में परिपक्वता कम हो रही है।
लोकतंत्र के हवन की पावन अग्नि में पक्ष विपक्ष के मध्य वैचारिक मतभेद होना सामग्री की भाँति अनिवार्य है, एक सफल लोकतंत्र एवं समाज का निर्माण इसी अग्नि की ऊर्जा से होता है। विचारो की लड़ाई, तर्क वितर्कों के मंथन से ही तो देश की समृद्धि का रास्ता निकालना राजनीति का उद्देश्य है। लेकिन आज भारतीय राजनीति में कुछ राजनीतिक दलों एवं कुछ नेताओं द्वारा अपने अहंकार और किसी वर्ग विशेष की स्वार्थपरता के लिए राष्ट्रीय और राष्ट्रप्रेम से जुड़ी चीजों को दरकिनार करते देखना बेहद हृदयविदारक है।
विश्व के इतिहास में सत्ता हासिल करना राजनीति का एकमात्र लक्ष्य कभी नहीं था और ना ही कभी किसी सभ्य समाज में यह एकमात्र लक्ष्य होना चाहिए। राजनेताओं को यह समझना होगा की राजनीति का लक्ष्य समाज और राष्ट्र के कल्याण हेतु नीतियों की संरचना होता है। वह नीतियाँ जो राष्ट्र की पहचान को दरकिनार कर आगे बढ़ने का सपना संजो रही है वह समय चक्र के साथ एक रेत की इमारत की तरह ढह जाएगी।
राजनीतिक दलों और नेताओं को यह समझना होगा कि वह सत्ता पक्ष से वैचारिक युद्ध करने के किए स्वतंत्र है, वैचारिक मतभेदों से सत्ता पक्ष पर आक्रमण निरंतर करे किंतु भारत की अंतरात्मा, उसकी सांस्कृतिक धरोहर, उसकी कला, उसकी समृद्ध ज्ञान प्रणाली पर कटाक्ष करना उसका उपहास करना राजनीति नहीं किंतु एक वैचारिक राष्ट्रद्रोह है और राष्ट्र से द्रोह कभी राजनीति नहीं हो सकती। यह समय, यह सदी भारत माता की सदी है।
आज समग्र विश्व की पुकार है की वसुदेव कुटुम्बकम का नारा लेकर भारत एक स्वर्णिम युग के निर्माण में अपना योगदान दे। राजनीतिक दलों को राष्ट्रीय प्रतीकों को गले लगाकर आगे बढ़ना होगा, जिस राष्ट्र को सम्पूर्ण विश्व एक गुरु की भाँति देखता है उसके राजनेताओं को सत्ता लोभ से ऊपर उठकर राष्ट्रप्रेम, राष्ट्र की संस्कृति, उसकी विरासत को माथे पर एक गौरव की तरह संजोकर आगे बढ़ना होगा क्योंकि पार्टियां बनेगी, टूटेंगी, सरकारे आयेंगी, जायेंगी लेकिन यह देश, यह देश रहना चाहिए। इस भारत माँ का गौरव उगते हुए सूर्य के तेज के समान चमकना चाहिए।




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