कर्तव्यनिष्ठा को ताक पर रखकर कुर्सी तोड़ रहे जिम्मेदार, जनता पूछ रही है - दंडित कौन होगा?
ग़ाज़ियाबाद : ब्यूरो चीफ दिनेश जमदग्नि। कहते हैं कि दिया तले अंधेरा होता है, यह कहावत ग़ाज़ियाबाद नगर निगम मुख्यालय पर बिल्कुल सटीक बैठती है। नगर निगम मुख्यालय की दीवार से सटी कॉमर्शियल मार्केट की मुख्य सड़क की हालत इतनी जर्जर हो चुकी है कि वहां पैदल चलना भी मुहाल हो गया है।
जिस निगम पर पूरे शहर की सड़कों, नालियों और सफाई की जिम्मेदारी है, उसके अपने मुख्यालय के बाहर ही व्यवस्था बदहाल पड़ी है। यह सिर्फ सड़क का टूटना नहीं है, यह नगर निगम के निर्माण विभाग की कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही का जीता-जागता प्रमाण है।
जनता परेशान, अधिकारी बेपरवाह: -
पिछले कई महीनों से इस सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई इंटरलॉकिंग टाइल्स और जगह-जगह फैला निर्माण मलबा पड़ा हुआ है। बरसात में इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों का फिसलकर गिरना रोज की बात हो गई है। कॉमर्शियल मार्केट होने के कारण दिनभर हजारों लोगों का आवागमन होता है, दुकानदारों का व्यापार प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय दुकानदारों व निवासियों ने बताया, "हम कई बार नगर निगम में शिकायत कर चुके हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिलता है। मुख्यालय के अधिकारी इसी सड़क से रोज गुजरते हैं, फिर भी उन्हें यह बदहाली नहीं दिखती, यह दुर्भाग्यपूर्ण है।"
कर्तव्यनिष्ठा का पाठ भूल गए अधिकारी: -
यह सवाल सिर्फ एक सड़क का नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा का है। जनता के टैक्स के पैसे से वेतन लेने वाले अधिकारियों को यह समझना होगा कि कुर्सी पर बैठना ही सेवा नहीं है। कर्तव्यनिष्ठा का अर्थ है - अपनी जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाना।
निर्माण विभाग के जिम्मेदार अभियंताओं को आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वे अपने पद के साथ न्याय कर रहे हैं? अगर निगम मुख्यालय के 100 मीटर के दायरे में यह हाल है, तो शहर के अंदरूनी इलाकों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।
इसके बिल्कुल बराबर में ही ग़ाज़ियाबाद विकास प्राधिकरण का मुख्य कार्यालय है। बिल्कुल बराबर में संतोष हॉस्पिटल है। निकट में ही रोडवेज बस अड्डा भी है तथा समीप में ही जटवाड़ा सब्जी मंडी भी है। ढेर सारे बैंक व पोस्ट ऑफिस भी पास में है तथा ग़ाज़ियाबाद की पुरानी कॉमर्शियल मार्केट नवयुग मार्केट में यह सब स्थित है।
जागरूकता और कार्रवाई जरूरी: -
इस समाचार के माध्यम से हम नगर निगम के आला अधिकारियों और नगर आयुक्त महोदय से मांग करते हैं कि -
1. इस सड़क का तत्काल निरीक्षण कर 48 घंटे के भीतर मरम्मत कार्य शुरू कराया जाए।
2. इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार निर्माण विभाग के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और उन पर नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
3. भविष्य में ऐसी लापरवाही न हो, इसके लिए एक पारदर्शी निगरानी तंत्र बनाया जाए।
नगर निगम कोई निजी कंपनी नहीं, जनता की संस्था है। अधिकारियों को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे जनता के सेवक हैं, स्वामी नहीं। अगर समय रहते नहीं चेते, तो जनता का विश्वास उठ जाएगा, जिसे दोबारा कायम करना सबसे मुश्किल काम होगा।




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