गाजियाबाद। एक बार फिर गाजियाबाद में भूमाफियाओं ने कानून व्यवस्था की धज्जियां उड़ाते हुए आम आदमी की मेहनत की कमाई पर कब्जा जमा लिया है। रविवार को थाना नंदग्राम के ग्राम अटोर स्थित ग्रीन सिटी विलेज में हुई इस घटना ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है। जहां पहले फिल्म 'जिला गाजियाबाद' में दिखाए गए दबंग बदमाश गरीबों की जमीन हड़पते नजर आते थे, वही सीन अब हकीकत बन चुका है।
क्या है घटना?
कई साल पहले कृषि भूमि पर अवैध रूप से काटी गई फ्रीहोल्ड कॉलोनी में सुशील कुमार निर्वाण, कपिल शर्मा और धर्मवीर सिंह नाम के तीन भूमाफियाओं ने प्लॉट बेचे। गरीब-मध्यम वर्ग के लोग खून-पसीने की कमाई से प्लॉट खरीदकर भविष्य संवारने का सपना देख रहे थे। रजिस्ट्री भी पूरी हो चुकी थी, स्वामित्व और कब्जा उनके नाम हो चुका था। लेकिन रविवार को जब 1-2 परिवार अपने प्लॉट देखने पहुंचे तो उनके होश उड़ गए। उनके प्लॉट पर ना कोई दीवार बची थी, ना कोई निशान – बल्कि बीच से मिट्टी का अवैध रास्ता (मड रोड) बन चुका था।
जानकारी फैलते ही बाकी पीड़ित भी मौके पर पहुंचे तो पता चला कि 15 प्लॉटों पर पूरी तरह कब्जा हो चुका है। सभी की चारदीवारी तोड़ दी गई, परिदृश्य बदल दिया गया और अवैध निर्माण की तैयारी शुरू कर दी गई। पीड़ितों ने बताया कि इन भूमाफियाओं ने गुंडा तत्वों की मदद से यह सब किया और संपर्क करने पर उल्टा धमकियां दीं।
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पीड़ितों ने दर्ज कराई शिकायत: -
15 पीड़ितों ने थाना नंदग्राम में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उनके वकील वैभव सिन्हा ने थानाध्यक्ष को विस्तृत आवेदन दिया, जिसमें श्री दीपक चौधरी को सभी पीड़ितों का सामूहिक प्रतिनिधि बनाया गया है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 329 (आपराधिक प्रवेश) और 333 के तहत प्राथमिकी दर्ज करने, तत्काल पुलिस कार्रवाई, स्थल निरीक्षण और अवैध निर्माण रोकने की मांग की गई है।
प्रत्येक पीड़ित ने 5 लाख रुपये का मुआवजा भी आरक्षित रखा है। शिकायतकर्ताओं में शरद सिन्हा, प्रेम लता त्यागी, अनुनय कुमार श्रीवास्तव, रागिनी सिंह, ललन कुमार, आर्टी सिंह, रेणु सिंह, अरुण कुमार सिंह, स्वाति, ज्योति सिंह, सौरभ अग्रवाल समेत 15 लोग शामिल हैं। उनके प्लॉट क्षेत्रक्रम संख्या 336 में स्थित हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल सैकड़ों गज है।
पीड़ितों का आरोप है कि सुशील कुमार निर्वाण पहले भी कई लोगों के साथ फ्रॉड कर चुका है और उसके खिलाफ कोर्ट में कई मामले लंबित हैं। अब योगी सरकार के सख्त रुख के बावजूद यह गिरोह एक बार फिर सक्रिय हो गया है।
अंत में कुछ गंभीर सवाल...
क्या नंदग्राम थाना पुलिस इस मामले में तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई करेगी या फिर मामला लंबा खिंच जाएगा?
क्या योगी आदित्यनाथ सरकार, जो भूमाफियाओं पर 'एनकाउंटर' और जेल का कहर बरपा रही थी, इस बार भी अपना 'जीरो टॉलरेंस' वाला रुख दिखाएगी या फिर यह गिरोह एक नई चुनौती बनकर उभरेगा?
क्या गाजियाबाद प्रशासन कृषि भूमि पर बनी अवैध कॉलोनियों की जांच कराएगा?
और सबसे बड़ा सवाल – आखिर कब तक आम आदमी की खून-पसीने की कमाई वाली जमीन पर माफिया राज चलेगा?
पीड़ित अब न्याय की उम्मीद लगाए बैठे हैं। देखना होगा कि पुलिस-प्रशासन इस बार कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।




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