धड़कनें सुरमयी-सुरमयी हैं प्रिये !

सामने कल्पनाएं खड़ी हैं प्रिये !

मुस्कुराती मदिर मन में मेंहदी मधुर

रंग में रश्मियां रम रही हैं प्रिये !


कामनाएं गुलाबी-गुलाबी हुईं

वीथियां स्वप्न की सुनहरी हैं प्रिये !

नेह का रंग गहरा निखर आएगा

मन जुड़े , आत्माएं जुड़ी हैं प्रिये !


तुम निहारो हमें , हम निहारें तुम्हें

भाग्य से चंद्र-रातें मिली हैं प्रिये !

इन क्षणों को बनादें मधुर से मधुर

जन्मों की अर्चनाएं फली हैं प्रिये ! 


मेघ छाए , छुपा चंद्र , तारे हंसे

चंद्र-किरणें छुपी झांकती हैं प्रिये !

बिजलियों से डरो मत ; हमें स्वर्ग से

अप्सराएं मुदित देखती हैं प्रिये !


मौन निःशब्द नीरव थमा है समय

सांस और धड़कनें गा रही हैं प्रिये !

बंध क्षण-क्षण कसे जाएं भुजपाश के

प्रिय-मिलन की ये घड़ियां बड़ी हैं प्रिये !


देह चंदन महक , सांस में मोगरा

भीनी गंधें प्रणय रच रही हैं प्रिये !

भोजपत्रक हैं तन , हैं अधर लेखनी

भावमय गीतिकाएं लिखी हैं प्रिये !


अनवरत बुझ रहीं, अनवरत बढ़ रहीं

कामनाएं बहुत बावली हैं प्रिये !

लौ प्रणय-यज्ञ की लपलपाती लगे

देह आहूतियां सौंपती हैं प्रिये !


उच्चरित-प्रस्फुटित मंत्र अधरों से कुछ

सांस से कुछ ॠचाएं पढ़ी हैं प्रिये !

रैन बीती , उषा मुस्कुराने लगी

और तृष्णाएं सिर पर चढ़ी हैं प्रिये !


- धरम पाल एस. एल. बरमन

भूतपूर्व सैनिक, लेखक व कवि 

जिला - शहडोल ( म.प्र.)

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