पुनीत माथुर। "अस्तित्व के लिए सह-अस्तित्व अनिवार्य है" ये केवल एक नैतिक उपदेश नहीं है, बल्कि यह एक कठोर वैज्ञानिक सत्य है। प्रकृति में कोई भी जीव अकेला जीवित नहीं रह सकता, हम सब एक-दूसरे से एक अदृश्य धागे  से जुड़े हैं। 

यहां कुछ मुख्य बिंदु हैं जो समझाते हैं कि वन्यजीवों का बचना हमारे अपने जीवन के लिए क्यों जरूरी है:

प्रकृति एक विशाल मशीन की तरह है और हर वन्यजीव उसका एक पुर्जा हैं। उदाहरण के तौर पर यदि जंगलों से बाघ या शेर खत्म हो जाएं, तो शाकाहारी जानवरों (हिरण आदि) की संख्या अनियंत्रित हो जाएगी। वे सारे जंगल चर जाएंगे, जिससे हरियाली खत्म होगी और अंततः ऑक्सीजन और वर्षा चक्र प्रभावित होगा। यानी एक प्रजाति का विनाश पूरी श्रृंखला को तोड़ देता है। 

क्या आप जानते हैं कि हमारे भोजन का एक बड़ा हिस्सा वन्यजीवों, विशेषकर मधुमक्खियों और तितलियों पर निर्भर है? ये जीव पौधों में परागण करते हैं।

अगर ये वन्यजीव नहीं रहेंगे, तो फसलें पैदा नहीं होंगी और दुनिया में अकाल की स्थिति पैदा हो जाएगी। वन्यजीव और घने जंगल एक-दूसरे के पूरक हैं।जंगल बादलों को आकर्षित करते हैं और मिट्टी के कटाव को रोकते हैं। जंगलों के बिना नदियां सूख जाएंगी। 

वन्यजीव इन जंगलों को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं (जैसे हाथी पेड़ों को गिराकर नई घास के लिए जगह बनाते हैं, या पक्षी बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं)। 

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि जब हम वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नष्ट करते हैं, तो वे इंसानी बस्तियों की ओर आते हैं। इससे वन्यजीवों में रहने वाले वायरस इंसानों में प्रवेश कर जाते हैं (जैसे कोरोना या इबोला जैसी बीमारियां)। वन्यजीव सुरक्षित रहेंगे, तो वे वायरस भी जंगलों तक सीमित रहेंगे। 

हमें समझना होगा कि हम मालिक नहीं, हिस्सेदार हैं। इंसान ने अक्सर खुद को प्रकृति का मालिक समझा है, जबकि हम केवल इसके एक हिस्सेदार हैं।

"प्रकृति के पास हमारी जरूरतों के लिए सब कुछ है, लेकिन हमारे लालच के लिए कुछ भी नहीं।"

यदि वन्यजीव समाप्त होते हैं, तो वह 'शून्य' इतना बड़ा होगा कि इंसान की आधुनिक तकनीक भी उसे भर नहीं पाएगी। इसलिए, वन्यजीवों को बचाना उन पर कोई 'एहसान' नहीं है, बल्कि यह हमारी स्वयं की रक्षा है।

इस मौके पर आइए पीएम मोदी जी के साथ सैर करें ’वनतारा’ की...


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