होलिका की 25 फीट ऊंची लपटों के बीच से निकलते संजू पंडा 

पुनीत माथुर। आज सुबह तड़के मथुरा के फालैन गांव में यह अद्भुत परंपरा फिर से दोहराई गई है। संजू पंडा नाम के भक्त ने धधकती हुई होलिका की करीब 20-25 फीट ऊंची लपटों के बीच से सकुशल निकलकर सदियों पुरानी परंपरा को निभाया। 

संजू पंडा जलती हुई होलिका के बीच से दौड़ते हुए निकले और उनके शरीर पर जलने का कोई निशान नहीं आया।

इस "अग्नि परीक्षा" के लिए संजू पंडा ने 40-45 दिनों तक प्रह्लाद मंदिर में कठिन साधना की, जिसमें वे जमीन पर सोए और केवल फल व दूध का आहार लिया।

फालैन गांव को भक्त प्रह्लाद का गांव माना जाता है। मान्यता है कि यहां का पंडा परिवार प्रह्लाद का स्वरूप धारण कर अग्नि से निकलता है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

अग्नि में प्रवेश करने से पहले संजू पंडा ने प्रह्लाद कुंड में स्नान किया। उनकी बहन ने जलती आग के चारों ओर की भूमि को जल से सिंचित किया, जिसके बाद वे नंगे पैर धधकती आग के बीच से निकल गए।

बता दें कि इस वर्ष चंद्रग्रहण के कारण होलिका दहन का समय बदला गया था और यह अनुष्ठान आज सुबह करीब 4 बजे संपन्न हुआ।

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