ब्यूरो चीफ मनोज कुमार दिल्ली: 

मध्य-पूर्व में जारी इजरायल और ईरान के बीच तनाव का असर अब भारत में भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। राजधानी दिल्ली समेत कई शहरों में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। हाल ही में दिल्ली और नोएडा जैसे इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत देखने को मिली, जहां लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ा। यह स्थिति आयात-निर्यात में आ रही बाधाओं के कारण उत्पन्न हुई है।

इसी बीच आम जनता पर एक और बोझ बढ़ गया है। पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खास तौर पर प्रीमियम पेट्रोल (स्पीड पेट्रोल) की कीमत में ₹2 प्रति लीटर का इजाफा हुआ है। पहले यह ₹101.77 प्रति लीटर मिल रहा था, जो अब बढ़कर ₹103.77 हो गया है। यह वृद्धि उन लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है, जो बेहतर माइलेज और इंजन की सेहत के लिए प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल करते हैं।

आम लोगों का कहना है कि भले ही बढ़ोतरी ₹2 की हो, लेकिन इसका असर सीधे उनकी जेब पर पड़ेगा। राधेश्याम नाम के एक वाहन चालक का कहना है कि ₹2 की बढ़ोतरी भी आम आदमी के लिए मायने रखती है। रोजाना वाहन चलाने वालों के खर्च में लगातार इजाफा हो रहा है। 

वहीं संतोष नाम के एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि पहले सिलेंडर की किल्लत थी, अब पेट्रोल महंगा हो गया है। सरकार को गरीब और मध्यम वर्ग के बारे में सोचना चाहिए। हालांकि कुछ लोग यह भी मानते हैं कि सरकार के हाथ भी अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते बंधे हुए हैं।

नोएडा निवासी शौर्य अग्रवाल का कहना है कि युद्ध की वजह से तेल के दाम बढ़ना तय है सरकार को पूरी तरह दोष नहीं दिया जा सकता, क्योंकि वैश्विक हालात का असर हर देश पर पड़ता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर रुख कर सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध की स्थिति लंबी खिंचती है, तो पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में आने वाले समय में आम जनता पर आर्थिक दबाव और बढ़ने की आशंका है।



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