ग़ाज़ियाबाद। शनिवार 3 जनवरी। नीतिखंड 2 इंदिरापुरम में श्रृंगी ऋषि कृष्णदत्त वेद यज्ञ विज्ञान न्यास के तत्वावधान में आयोजित 2 से 4 जनवरी तक सामवेद पारायण महायज्ञ के दूसरे दिन के यज्ञ में सामवेद उत्तरार्चिक भाग के वेद मन्त्रों से आहुति प्रदान की गई और सभी का कल्याण हो और सभी दिव्य चिंतन से जुड़कर राष्ट्र को उच्चता प्रदान करें, इस भाव को प्रकट किया गया।
यज्ञ के ब्रह्मा आचार्य जयवीर शास्त्री ने अपने सम्बोधन में कहा कि संस्कारों के लिए यज्ञ आदि धार्मिक आयोजन होने चाहिए, और प्रत्येक अभिभावक का कर्तव्य है कि वे अपने बच्चों को ऐसे कार्यक्रमों का हिस्सा बनाएँ, क्योंकि उससे संस्कार बनते है और सुसंस्कार ही जीवन की महत्वपूर्ण धरोहर है।
आज की शिक्षा व्यवस्था संस्कार देने में असमर्थ है इसलिए परिवारों को स्वयं नैतिक संवर्धन का कार्य करना पड़ेगा। यज्ञ उसकी पूर्ति का महत्वपूर्ण कारण, सामवेद की ऋचाओं की चर्चा करते हुए आचार्य जी ने कहा कि वेद की ऋचाएं हमारी चेतना को प्रभावित करती है उससे सदप्रेरणाएं प्राप्त होती है,और सदप्रेरणाएं ही हमारे जीवन की सबसे उत्तम प्रेरणाएं देती हैं। कल महायज्ञ की पूर्णाहुति है।
यज्ञ को संपादित करने के लिए प्रमुख रूप से डॉ कृष्णावतार, डॉ कमलदीप, योगी सोहित शास्त्री, आचार्य अमित शास्त्री, अध्वर्यु नीरज शास्त्री, चिराग शास्त्री, कुलवंत, कपिल त्यागी, निशित पाठक, हर्ष रावत, रोहित, धीरज सारस्वत, अंकित, मोहित त्यागी, चेतेंद्र यादव, मनमोहन मखीजा, अजय जुनेजा, कमल नेगी, नरेश अरोड़ा एवं प्रदीप गुप्ता आदि ने योगदान दिया।





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