ब्यूरो चीफ दिनेश जमदग्नि:

ग़ाज़ियाबाद। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण के नाम पर आम नागरिकों के वाहनों को जब्त किया जा रहा है, चालान काटे जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की प्रदूषण नीतियों को खुलेआम धता बताते हुए पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचाई जा रही है।

जीटी रोड पर प्रदूषण फैलाने की यह गंभीर घटना शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। इसी जीटी रोड से रोजाना सरकारी अधिकारियों का आवागमन होता है, इसके बावजूद सड़क के चप्पे-चप्पे पर सरकारी जमीन पर करीब चालीस फुट आगे तक अतिक्रमण कर वेल्डिंग का कार्य धुआं उड़ाते हुए रोजाना किया जा रहा है।

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वेल्डिंग से निकलने वाला जहरीला धुआं, चिंगारी और रसायनिक गैसें न केवल वायु प्रदूषण को बढ़ा रही हैं, बल्कि राहगीरों और आसपास के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन चुकी हैं। प्रदूषण फैलाने वाले बेखौफ होकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या यह नगर निगम सिटी जोन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पुलिस प्रशासन की निगाहों से अछूता है? एक अकेली वेल्डिंग की दुकान से निकलने वाला प्रदूषण कई सौ वाहनों के बराबर प्रदूषण पैदा कर रहा है, फिर भी प्रशासन मौन है।

आम जनता के वाहनों पर सख्ती दिखाने वाला प्रशासन इन खुलेआम आग जलाकर एवं वेल्डिंग के कार्यों से प्रदूषण फैलाने वालों पर कार्रवाई कब करेगा? क्या प्रदूषण नियंत्रण के नियम केवल आम आदमी के लिए हैं?

प्रशासन से मांग है कि जीटी रोड पर हो रहे अवैध वेल्डिंग कार्यों पर तत्काल रोक लगाई जाए, सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया जाए और प्रदूषण फैलाने की गंभीर घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके और प्रदूषण नीति का निष्पक्ष क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।



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